Posts

सम्पूर्ण सत्यार्थप्रकाश

Image
ओ३म् सत्यार्थप्रकाशः सम्पूर्ण सत्यार्थप्रकाश   Click now वेदादिविविधसच्छास्त्रप्रमाणैः समन्वितः श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य- महर्षिदयानन्दसरस्वतीस्वामिविरचितः (सर्वथा राजनियमे नियोजितः) अथ सत्यार्थप्रकाशः महर्षि दयानन्द सरस्वती रचित ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पुस्तक प्राप्ति स्थान:— १. https://www.paropkarinisabha.com   whatsapp +91 9460039455 २. https://rishimission.com    Whatsapp +91 9314394421 ३. https://vedrishi.com whatsapp +919818704609 ४. आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट whatsapp +91 9650522778 ५. https://vedicprakashan.com   whatsapp +91 9650183336 ६. https://www.vedicbooks.com   whatsapp +91 9810064035 सत्यार्थ प्रकाश Pdf   DOWNLOAD सत्यार्थ प्रकाश Audio Book   DOWNLOAD प्रकाशकीय सत्यार्थप्रकाशस्य  सूचिपत्रम्, भूमिका   १.  प्रथम समुल्लास में ईश्वर के ‘ओङ्कार’-आदि नामों की व्याख्या। प्रथम समुल्लास   २.  द्वितीय समुल्लास में सन्तानों की शिक्षा।  द्वितीय समुल्लास   ३.  तृतीय समुल्लास में ब्रह्मचर्य, पठन-पाठन...

एकादशः समुल्लासः

उत्तरार्द्ध : अनुभूमिका (१)   सम्पूर्ण सत्यार्थप्रकाश   Click now यह सिद्ध बात है कि पांच सहस्र वर्षों के पूर्व वेद-मत से भिन्न दूसरा कोई भी मत न था, क्योंकि वेदोक्त सब बातें विद्या से अविरुद्ध हैं। वेदों की अप्रवृत्ति होने का कारण महाभारत-युद्ध हुआ। इनकी अप्रवृत्ति से अविद्यान्धकार के भूगोल में विस्तृत होने से मनुष्यों की बुद्धि भ्रमयुक्त होकर जिसके मन में जैसा आया, वैसा मत चलाया। उन सब मतों में ४ (चार) मत अर्थात् जो वेदविरुद्ध पुराणी, जैनी, किरानी, और कुरानी सभी मतों के मूल हैं, वे क्रम से एक के पीछे दूसरा, तीसरा, चौथा चला है। अब इन चारों की शाखायें एक सहस्र से कम नहीं हैं। इन सब मतवादियों, इनके चेलों और अन्य सबको परस्पर सत्यासत्य के विचार करने में अधिक परिश्रम न हो, इसलिये यह ग्रन्थ बनाया है। जो-जो इसमें सत्य-मत का मण्डन और असत्य का खण्डन लिखा है, वह सबको जनाना ही प्रयोजन समझा गया है। इसमें जैसी मेरी बुद्धि, जितनी विद्या है, और जितना इन चारों मतों के मूल ग्रन्थ देखने से बोध हुआ है, उसको सबके आगे निवेदित कर देना मैंने उत्तम समझा है, क्योंकि लुप्त हुए विज्ञान का पुनर्मिलना स...